804 करोड़ रुपये से अधिक के 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव केंद्र को मिले, 280 बसाहटों को जोड़ने की तैयारी; दुर्गम और नक्सलमुक्त गांवों के लिए विशेष छूट की मांग

रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों को गति मिली है। संभाग की 485 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं, 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के तहत 841.825 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों की जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार से विशेष छूट देने का आग्रह किया था। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में सकारात्मक रुख अपनाते हुए सड़क एवं पुल निर्माण से जुड़ी प्रगति और आगे की कार्यवाही की जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के विकास के लिए सहयोग देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है।
1,168 बसाहटों में सड़क संपर्क के लिए चल रही कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, बस्तर संभाग की कुल 1,168 बसाहटों से संबंधित सड़क कार्य अलग-अलग चरणों में हैं। इनमें 485 बसाहटों के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के दूसरे बैच के अंतर्गत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव मिले हैं। इसके अलावा लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार किए जा रहे हैं।
योजना के प्रथम बैच में 234 बसाहटों के सड़क कार्यों को स्वीकृति मिली है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा की 16 बसाहटें शामिल हैं।
सातों जिलों की 754 बसाहटों के लिए भी प्रस्ताव तैयार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के दूसरे बैच में बस्तर की सातों जिलों की 754 बसाहटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें बस्तर की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोंडागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटें शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण के साथ प्रस्तावित सड़कों को गति शक्ति योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी की जा रही है। सड़कों के निर्माण से दूरस्थ वनांचलों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, बाजारों और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
373 पुलों के प्रस्तावों पर विचार, लंबे पुलों से मिलेगी राहत
बस्तर में सड़क संपर्क के साथ पुल निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री के पत्र के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के प्रथम बैच के अंतर्गत 206 पुलों तथा पीएम-जनमन योजना के तहत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार के लिए अधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई है। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति दिए जाने की जानकारी दी गई है।
बस्तर संभाग के लिए 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। नारायणपुर जिले में पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत 22 लंबे पुलों के प्रस्ताव हैं, जिनकी अनुमानित लागत करीब 87.45 करोड़ रुपये बताई गई है। पुलों के निर्माण से बारिश के दौरान नदी-नालों के कारण संपर्क से कट जाने वाले गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नक्सलमुक्त गांवों के लिए विशेष छूट की मांग
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बस्तर की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क निर्माण के पात्रता नियमों में आवश्यक छूट दी जाए। क्षेत्र में कई छोटी और दूरस्थ बसाहटों की आबादी 100 से भी कम है। ऐसे में निर्धारित जनसंख्या संबंधी मानकों के कारण कुछ गांव बारहमासी सड़क संपर्क की पात्रता से बाहर रह जाते हैं।
राज्य सरकार ने क्लस्टर की जनसंख्या गणना में छूट देने तथा 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क निर्माण की स्वीकृति देने की आवश्यकता उठाई है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शेष पात्र बसाहटों की पहचान और उनकी जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (GSS) ऐप के माध्यम से चार माह का सर्वेक्षण शुरू किया गया है। विशेष छूट और क्लस्टर आधारित व्यवस्था के अनुरोध पर प्राप्त तथ्यों तथा लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा।
“सड़कें बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार” : विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के साथ बस्तर में विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि जिन गांवों में वर्षों तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा, वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
उन्होंने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। पक्की सड़क बनने से बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को समय पर उपचार दिलाने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है।
विजय शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की राह आसान होगी। सरकार का संकल्प है कि नक्सलवाद से मुक्त होने वाले गांवों तक विकास की सुविधाएं पहुंचें और कोई भी बसाहट केवल कम आबादी या कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क संपर्क से वंचित न रहे।
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