बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर आयोग गंभीर, बैग के वजन की निगरानी से लेकर ‘बैगलेस डे’ तक के सुझाव
रायपुर। स्कूली बच्चों को भारी बस्तों के बोझ से राहत दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा पत्र भेजकर प्रदेश के स्कूलों में बस्तों का वजन नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने की मांग की है। आयोग का मानना है कि भारी बस्तों के कारण बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक मुद्रा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आयोग ने अपनी अनुशंसाओं में प्रो. यशपाल समिति की रिपोर्ट ‘शिक्षा बिना बोझ के’, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एनसीईआरटी की ‘स्कूल बैग पॉलिसी 2020’ का उल्लेख करते हुए कहा है कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के कुल शारीरिक वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
कक्षा के अनुसार बस्ते का वजन रखने का सुझाव
आयोग ने अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए बस्ते के वजन की सीमा निर्धारित करने की अनुशंसा की है।
- नर्सरी से यूकेजी: ‘नो बैग, नो टेक्स्टबुक’ नीति लागू करने का सुझाव।
- कक्षा 1 और 2: बस्ते का वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम तक रखने और होमवर्क के बोझ से मुक्त रखने की अनुशंसा।
- कक्षा 3 से 5: बस्ते का वजन 1.7 से 2.5 किलोग्राम तक रखने का सुझाव।
- कक्षा 6 और 7: 2 से 3 किलोग्राम तक वजन रखने की अनुशंसा।
- कक्षा 8: 2.5 से 4 किलोग्राम तक वजन रखने का सुझाव।
- कक्षा 9 और 10: बस्ते का वजन 2.5 से 4.5 किलोग्राम तक रखने की अनुशंसा।
- कक्षा 11 और 12: वजन 3.5 से 5 किलोग्राम तक सीमित रखने का सुझाव।
मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों के लिए साल में 10 दिन ‘बैगलेस डे’ आयोजित करने की भी अनुशंसा की गई है, ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ गतिविधि आधारित शिक्षा से जुड़ सकें।
स्कूलों में लगेंगी डिजिटल तौल मशीनें?
बस्तों के वजन पर प्रभावी निगरानी के लिए आयोग ने प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल तौल मशीन लगाने, बैग वेट रजिस्टर संधारित करने और किताबों पर उनका वजन मुद्रित करने जैसे उपाय सुझाए हैं। इससे स्कूल स्तर पर बस्तों के वजन की नियमित जांच की जा सकेगी।
आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि भारी संदर्भ पुस्तकों के स्थान पर दीक्षा और ई-पाठशाला जैसे डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों को प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, जिससे बच्चों को घर से पानी की भारी बोतलें लाने की जरूरत कम हो सके।
सभी स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
आयोग ने राज्य शासन से इन अनुशंसाओं पर विचार कर प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी विद्यालयों के लिए जल्द औपचारिक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है, तो बच्चों को भारी बस्तों से राहत मिलने के साथ पढ़ाई का माहौल अधिक सहज और स्वास्थ्य के अनुकूल बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन अनुशंसाओं के लागू होने की स्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक आदेशों पर निर्भर करेगी।
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