रायपुर। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों, उद्यानिकी उत्पादकों और पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने पर जोर दिया है, ताकि जलभराव के कारण फसलों को नुकसान न पहुंचे।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, फसलों में रोग एवं कीटों के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही आवश्यक कीटनाशकों और कवकनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। वहीं, रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से बुवाई शुरू करने की सलाह दी गई है।
सब्जियों और फलदार पौधों को दें सहारा
तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों ने करेला, लौकी जैसी लता वाली सब्जियों के पौधों को सहारा देने तथा केले के पौधों और फलदार वृक्षों को आवश्यकतानुसार सहारा प्रदान करने की सलाह दी है। खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने और बारिश के दौरान कीटनाशकों एवं कवकनाशकों का छिड़काव नहीं करने की अपील भी की गई है।
पशुधन की सुरक्षा पर भी जोर
पशुपालकों को अपने पशुओं को सुरक्षित एवं सूखे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। तेज हवा और बारिश के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले स्थानों पर बांधने से बचना चाहिए। साथ ही, पशुओं के लिए सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मौसम पूर्वानुमान पर रखें नजर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाकर चक्रवाती तूफान एवं संभावित भारी बारिश से फसलों, उद्यानिकी उत्पादन और पशुधन को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
