रायपुर में एपिकॉन-2026 के राष्ट्रीय अधिवेशन में राज्यपाल ने सस्ती दवाओं, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और औषधियों की गुणवत्ता पर दिया जोर
रायपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना, ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और नकली दवाओं पर रोक लगाना देश की प्रमुख चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा को केवल कारोबार नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
राज्यपाल श्री डेका शनिवार को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया (एपीटीआई) के 28वें राष्ट्रीय अधिवेशन एपिकॉन-2026 को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन की थीम ‘फार्मा शिक्षक आत्मनिर्भर भारत के लिए फार्मासिस्ट तैयार करने का संकल्प’ रखी गई थी।

आम आदमी की पहुंच में हों दवाएं
राज्यपाल ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन ग्रामीण आबादी तक बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना अब भी एक बड़ी चुनौती है। दवाओं की कीमतें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें आम आदमी आसानी से वहन कर सके।
उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि मरीजों को दवाएं लिखते समय उनकी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखा जाए। जहां संभव हो, वहां कम कीमत वाली प्रभावी दवाओं के विकल्प अपनाए जाएं, ताकि आर्थिक परेशानी के कारण किसी मरीज का इलाज प्रभावित न हो।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बढ़े स्वास्थ्य जागरूकता
राज्यपाल श्री डेका ने जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को गांवों तक पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना चाहिए।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ की वनौषधियों पर हो वैज्ञानिक शोध
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से संबंधित महत्वपूर्ण ज्ञान उपलब्ध है। विशेष रूप से बैगा समुदाय के पारंपरिक औषधीय ज्ञान का वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की आधुनिक वैज्ञानिक शोध के माध्यम से जांच करने और उनकी उपयोगिता का आकलन करने पर जोर दिया। इससे वन आधारित औषधीय संसाधनों की संभावनाओं को समझने और नए उत्पादों के विकास में मदद मिल सकती है।

नकली दवाओं पर नियंत्रण जरूरी
राज्यपाल ने नकली दवाओं को लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि नकली दवाओं से मरीजों के जीवन पर संकट पैदा हो सकता है और चिकित्सा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों, शिक्षकों और दवा उद्योग से जुड़े लोगों से दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट का उपयोग ज्ञान बढ़ाने के लिए करने की सलाह दी। साथ ही मौलिक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों को महत्व देने की बात कही।
फार्मेसी शिक्षा में शामिल हुए नए विषय
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू एम. पटेल ने बताया कि बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों को देखते हुए फार्मेसी पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मेडिकल डिवाइस जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
उन्होंने अनावश्यक एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के 42 स्थानों पर चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी दी।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने विश्वविद्यालय में संचालित शोध कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के वन आधारित औषधीय संसाधनों से नए उत्पाद विकसित करने और फार्मेसी शोध को अन्य विज्ञान विषयों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
एपीटीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिंद जनराव उमेकऱ ने संगठन की गतिविधियों और फार्मेसी शिक्षकों के प्रशिक्षण, शोध तथा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी।
भारतीय शिक्षा मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी.आर. शंकरानंद ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा को सामाजिक बदलाव और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

अधिवेशन में शामिल हुए 1,800 से अधिक प्रतिभागी
एपिकॉन-2026 के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से लगभग 700 शिक्षक, 900 विद्यार्थी और फार्मेसी, विपणन तथा उद्योग जगत से जुड़े करीब 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
अधिवेशन में सस्ती दवाओं की उपलब्धता, सुरक्षित उपचार, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
